ना तुमने करी कोशिश- शिशिर मधुकर

जुदा होकर समय जो तुमसे मैंने तन्हा काटा है दर्द सीने में रक्खा है किसी के संग ना बाटा हैतुम्हारी ढाल बन जिनसे मैंने महफूज़ रक्खा था उन्होंने सर कलम करने को अब मुझको छांटा है मुहब्बत के सिवा मुझको झुका ना पाएगा कुछ भी मैंने डर कर कभी इंसान का तलवा ना चाटा है ज्वार में छुप गया सब कुछ उफनते आब के नीचे चोट साहिल की दिखती है गुज़र जाता जो भाटा है खाइयां बढ़ गईं इतनी कि अब मिलना हुआ दूभर ना तुमने करी कोशिश ना इन्हें मधुकर ने पाटा है शिशिर मधुकर

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6 Comments

  1. C.M. Sharma 16/07/2018
    • Shishir "Madhukar" 16/07/2018
      • C.M. Sharma 16/07/2018
        • Shishir "Madhukar" 16/07/2018
  2. ANU MAHESHWARI 16/07/2018
    • Shishir "Madhukar" 16/07/2018

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