कविता – अनु महेश्वरी

कविता लिखना मुझे है पसन्द,पर किसी बंधन में ना बंधना चाहती|जो आसानी से आ जाये समझ,ऐसी सरल भाषा में लिखना चाहती|कलम से निकली आवाज़ से,लोगो के दिलो को झकझोड़ना चाहती|समाज की कमिया लिख के,सोये लोगो को मैं जगाना चाहती|दिल से लिखी गयी बातों से,लोगो के दिलों तक पहुँचना चाहती|अनु महेश्वरी

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6 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 12/07/2018
    • ANU MAHESHWARI 12/07/2018
  2. C.M. Sharma 13/07/2018
    • ANU MAHESHWARI 13/07/2018
  3. डी. के. निवातिया 13/07/2018
    • ANU MAHESHWARI 16/07/2018

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