पास मेरे तुम आ जाना..!

जब चल-चल तुम थक जाओ,तब पास मेरे तुम आ जाना।सब जग से ठोकर पाओ,तब पास मेरे तुम आ जाना॥नहीं कहूँगा तुमसे कि,जब चले गए थे आए क्यों।सोच-सोच के इधर-उधर की,मत घबराना, आ जाना॥सीधी-सीधी बात कहूँगा,तुमसे भी जब फ़िर आओगे।बिना बात ना बात बनाना,मत समझाना, आ जाना॥जब जाते हो तो मन है तुम्हारा,आओगे अपने मन से।तब राह में यूँ ही छोड़ गए,अब मत शरमाना, आ जाना॥थोड़ा तो मन बिगड़ा है,थोड़ा-सा नाराज़ भी हूँ।थोड़ा जो नज़रें फेरूँ,तो मत क़तराना, आ जाना॥बात-बात में बात तुम्हारी।अक़्सर ही कर लेता हूँ।गर मन में कुछ बात रही हो,बात बताना, आ जाना॥गर तुम ने सोचा है ये,कि तुम्हें मनाने आऊँगा।इंतज़ार में नज़रें अपनी,नहीं बिछाना, आ जाना॥रोज़-रोज़ तो ऐसा कुछ,न हो पाएगा मुझसे भी।आते हो तो आ जाओ,अब फ़िर से मुड़ कर ना जाना॥‘भोर’ आशा टूटती है,क्यों भला तुम आओगे।मेरी आशाओं को अब,न आज़माना, आ जाना॥जब चल-चल तुम थक जाओ,तब पास मेरे तुम आ जाना।सब से जो ठोकर पाओ,हो बुरा ज़माना, आ जाना॥©प्रभात सिंह राणा ‘भोर’मेरी अन्य रचनाओँ हेतु www.bhorabhivyakti.tk पर जाएँ।धन्यवाद!

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4 Comments

  1. C.M. Sharma C.M. Sharma 12/07/2018
      • C.M. Sharma C.M. Sharma 13/07/2018

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