पत्थर का टुकड़ा – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

  • पत्थर का टुकड़ा टूटा हैजिसको तुम हीरा कहते हो।दिल भी टूटे इसी तरह सेजिसको तुम पीड़ा कहते हो।

पत्थर तो पत्थर है साथीतुम पत्थर दिल ये मत करना।प्रेम सदा बरसाते रहनाजहर इस जिगर को मत करना।भूल रहा जो अपने पथ कोउसको तुम राह दिखा देना।अपने कर्तव्य भूल रहे जोमानव का मंत्र सिखा देना।जो भी करना सच्चे मन सेमंजिल तेरे मिल जायेंगे।मेहनत और भरोसा करकेजीवन के फूल खिल जायेंगे।महल अटारी रुपये पैसेधरती पर ही रह जायेगे।सत्य अहिंसा प्रेम व पूजाइतिहास तेरे कह जायेगे। 

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2 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 11/07/2018
    • bhupendradave 11/07/2018

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