पाखंडियों ने रच डाला – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

हिन्दु मुस्लमान सिख इसाईभ्रम  क्यों अब  इन बातों में ।आपस में क्यों तू तू – मैं मैंखड़ी है दीवार   विवादों में ।जात – पात के  खेले वेलेपाखंडियों ने रच डाले थे।अपने स्वार्थ के खातिर मेधर्म को ही आड़े लाया थे।धर्म तो है बंधन जीने काएक ही मार्ग पर चलने का।ऊँच नीच का ख्याल कराकरहै काम किया वह छलने का।हम भारत के रहने वालेआपस में लड़ते आये हैं।दुश्मन तो है घात लगायेक्यों हम सब डरते आये हैं।हम थे इतने समर्थ वान कीविश्व गुरु हम कहलाते थे।इतिहास उलट कर देखो तोअपनी झंडा लहराते थे।मिल कर तो हम अब भी रहतेपर गद्दारी कुछ करते हैं।न जानें क्यों वैर है मन मेंऐसे रंगदारी करते हैं।हम हीं सह देते हैं इनकोजो लालच करने वाले हैं।लानत है ऐसी नीति कोजो इस पर चलने वाले हैं।शासन प्रशासन नेता नायकआपस में खींचा तानी है।दोष हमारी जनता की हैहम कैसे हिन्दुस्तानी हैं।गद्दारों को सवक सिखा दोजागो जवानों  अब जागो।बख्शो नहीं अपराध जरा भीबे धड़क  गोली अब मारो।

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2 Comments

  1. डी. के. निवातिया 10/07/2018
  2. Dr Swati Gupta 11/07/2018

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