ये इश्क ना

ये इश्क नाकिसी को कैसे हो जाता हैनजरो का नजरो से मुलाकात करा बैठता हैये इश्क ना जीने देता है किसी कोना मरने देता हैकिसी को किसी के लिए तड़पाता हैकिसी का इंतज़ार बढ़ाता हैआँखों से जब बह चलते है अश्क जोकोई कमबख्त इसे बरसात समझ बैठता हैये इश्क नाचीज भी है अजीब ना ऐतबार करने देता है खुद परना इन्कार होने देता हैये इश्क नाअपने ही ताने -बाने बुनता हैअपने ही सपने दिखाता हैये इश्क नाजब किसी को किसी से हो जाता हैकोई गीत लिखने बैठ जाता हैकिसी को शायर बना जाता हैये इश्क नाबड़ी लाईलाज बीमारी हैजब किसी को होता हैसाँस ले कर ही साँस लेता है -अभिषेक राजहंस

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  1. Bindeshwar prasad sharma 10/07/2018

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