मिलन….सी.एम्.शर्मा (बब्बू)…

क्यूँ वीणा है मौन मेरी…नयनं में भी नीर नहीं…विरह सलिल तृषित नहीं…हृदय में क्यूँ पीड़ नहीं…क्यूँ पंक में पंकज खिले…सरिता सागर में क्यूँ मिले…नाद दनादन गूंजे भीतर…शोर बाहर क्यूँ नहीं मिले….धीरज ध्यान धर्म सब गूंगे…बहरे हुए हैं कर्ण सभी के…वैरी हाथ में ज़हर लिये हैं…प्रेम मधुशाला क्यूँकर भीगे…विरह पुलकित दर्द निहारे…मलिन नीर हुआ गंगा धारे…नाव डूब कर लगी किनारे…रूह उतरी है प्रीतम द्वारे…\/सी.एम्.शर्मा (बब्बू)

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12 Comments

  1. Abhishek Rajhans 09/07/2018
    • C.M. Sharma 11/07/2018
  2. Rajeev Gupta 09/07/2018
    • C.M. Sharma 11/07/2018
  3. Shishir "Madhukar" 10/07/2018
    • C.M. Sharma 11/07/2018
  4. Bindeshwar prasad sharma 10/07/2018
    • C.M. Sharma 11/07/2018
  5. डी. के. निवातिया 10/07/2018
    • C.M. Sharma 11/07/2018
  6. Dr Swati Gupta 11/07/2018
    • C.M. Sharma 13/07/2018

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