मुहब्बत का बदरा- शिशिर मधुकर

मेरी नज़रों से खुद को जो तुम देख लो मेरी हालत पे तुमको तरस आएगा एक प्यासे को फिर से जिला दो जो तुम ये मुहब्बत का बदरा बरस जाएगा। चोट सहते हो तुम कुछ ना कहते हो तुम जाने कैसे अकेले से रहते हो तुम कई सालों से तुमने ना एहसां किया क्या बेज़ा ये मौसम सरस जाएगा। मेरी नज़रों से खुद को जो तुम देख लो मेरी हालत पे तुमको तरस आएगा एक प्यासे को फिर से जिला दो जो तुम ये मुहब्बत का बदरा बरस जाएगा। वक्त रुकता नहीं है किसी के लिए आओ मिल जाएं हम फिर ख़ुशी के लिए दूर तुमको अगर मानो सब ने किया कोई कैसे तुम्हारा दरस पाएगा। मेरी नज़रों से खुद को जो तुम देख लो मेरी हालत पे तुमको तरस आएगा एक प्यासे को फिर से जिला दो जो तुम ये मुहब्बत का बदरा बरस जाएगा। शिशिर मधुकर

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6 Comments

  1. kiran kapur gulati 09/07/2018
    • Shishir "Madhukar" 09/07/2018
  2. C.M. Sharma 09/07/2018
    • Shishir "Madhukar" 09/07/2018
  3. Rajeev Gupta 09/07/2018
    • Shishir "Madhukar" 09/07/2018

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