निशानी—संकलनकर्ता: महावीर उत्तरांचली

(1.)दास्ताँगो की निशानी कोई रक्खी है कि वोदास्ताँगोई के दौरान कहाँ जाता हैशाहीन अब्बास

(2.)उन की उल्फ़त में ये मिला हम कोज़ख़्म पाए हैं बस निशानी मेंमहावीर उत्तरांचली(3.)फेंकी न ‘मुनव्वर’ ने बुज़ुर्गों की निशानीदस्तार पुरानी है मगर बाँधे हुए हैमुनव्वर राना(4.)उड़ते पत्तों पे लपकती है यूँ डाली डालीजैसे जाते हुए मौसम की निशानी माँगेशाहिद कबीर(5.)ले जा दिलबेताब निशानी मिरी क़ासिदसीमाब से है मर्तबाइश्क़ ख़बर लावाजिद अली शाह अख़्तर(6.)कफ़पा हैं तिरे सहरा की निशानी ‘बेदार’मर गया तो भी फफूलों में रहे ख़ार कईमीर मोहम्मदी बेदार(7.)बारदिगर समय से किसी का गुज़र नहींआइंदगाँ के हक़ में निशानी फ़रेब हैशाहिद ज़की(8.)रंग अब कोई ख़लाओं में न थाकोई पहचान निशानी में न थीराजेन्द्र मनचंदा बानी(9.)ख़ुश्क पत्तों को चमन से ये समझ कर चुन लोहाथ शादाबीरफ़्ता की निशानी आईमख़मूर सईदी(10.)तुम उसे पानी समझते हो तो समझो साहबये समुंदर की निशानी है मिरे कूज़े मेंदिलावर अली आज़र(11.)चटानों पर करें कंदा निशानी अपने होने कीसुनहरे काग़ज़ों के गोश्वारे डूब जाएँगेअली अकबर अब्बास(12.)दाग़ के हैकल अनझुवाँ की माला ज़ीनतइश्क़ की यही निशानीफिरें मस्त जो बिरह के तन कूँ मोती लाल पिरोना क्याआबरू शाह मुबारक(13.)हवाएँ फूल ख़ुशबू धूप बारिशकिसी की हर निशानी मौसमों मेंनसीर अहमद नासिर(14.)अक़्लमंदी की निशानी सींग हैंभैंस ने सर पर जड़े हैं दोस्तोरियाज़ अहमद क़ादरी (15.)उस के गाँव की एक निशानी ये भी हैहर नलके का पानी मीठा होता हैज़िया मज़कूर(16.)ज़िंदगी जल चुकी थी लकड़ी सीराख बस बच गई निशानी मेंसचिन शालिनी(17.)याद आऊँगा जफ़ाकारों कोबेनिशानी है निशानी मेरीइम्दाद इमाम असर(18.)मेरी हस्ती है मुमय्यज़ बअदमबेनिशानी है निशानी मेरीइस्माइल मेरठी(19.)यहाँ इक शहर था शहरनिगाराँन छोड़ी वक़्त ने इस की निशानीनासिर काज़मी(20.)तुम मिरे दिल से गए हो तो निगाहों से भी जाओफिर वहाँ ठहरा नहीं करते निशानी छोड़ करशहनवाज़ ज़ैदी(21.)वक़्त गुज़रता जाता और ये ज़ख़्म हरे रहते तोबड़ी हिफ़ाज़त से रक्खी है तेरी निशानी कहतेआनिस मुईन(22.)शबविसाल अदू की यही निशानी हैनिशाँबोसारुख़्सार देखते जाओदाग़ देहलवी(23.)जान की तरह से रखता है अज़ीज़ ऐ गुलरूदाग़दिल लाला ने समझा है निशानी तेरीहैदर अली आतिश(24.)रंग ने गुल से दमअर्ज़परेशानीबज़्मबर्गगुल रेज़ामीना की निशानी माँगेमिर्ज़ा ग़ालिब(25.)हो कोई बहरूप उस का दिल धड़कता है ज़रूरमैं उसे पहचान लेता हूँ निशानी देख करशहज़ाद अहमद(26.)सूरतहाल पर हमारे मोहरदाग़ ने ज़ख़्म ने निशानी कीहैदर अली आतिश(27.)सारे संगमील भी मंज़िल हो सकते हैं भेद खुलाहाथों की रेखाओं में हर मंज़िल एक निशानी हैअम्बरीन सलाहुद्दीन (साभार, संदर्भ: ‘कविताकोश’; ‘रेख़्ता’; ‘स्वर्गविभा’; ‘प्रतिलिपि’; ‘साहित्यकुंज’ आदि हिंदी वेबसाइट्स।)

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