कोई नहीं है राज़ – शिशिर मधुकर

जीता है तुम को हार कर मैंने जहाँ में आज इतनी सी बस ये बात है कोई नहीं है राज़ संगीत की धुन प्रेम की बातें ही कहती है फनकार बिन खुद कभी बजते नहीं हैं साज़ रिश्ते निभाना ही महज़ उल्फ़त नहीं होती प्रेम का बंधन है ये मुझको है तुम पे नाज़पाने की चाहतें दफ़न करनी ही पड़ती हैं दिल के सौदों में कभी मिलते नहीं हैं ताज़ कोशिश करी जो भूलने की यार का चेहरा दिल मगर पागल कभी आता नहीं है बाज़ फितरत है जहाँ प्रेम की मजबूर हैं वो लोग तन्हाई में मधुकर कभी होते नहीं हैं काज़ शिशिर मधुकर

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12 Comments

  1. C.M. Sharma 06/07/2018
    • Shishir "Madhukar" 06/07/2018
      • C.M. Sharma 06/07/2018
        • Shishir "Madhukar" 06/07/2018
          • C.M. Sharma 06/07/2018
  2. Dr Swati Gupta 06/07/2018
    • Shishir "Madhukar" 06/07/2018
  3. bhupendradave 06/07/2018
    • Shishir "Madhukar" 07/07/2018
  4. kiran kapur gulati 07/07/2018
    • Shishir "Madhukar" 07/07/2018
  5. C.M. Sharma 07/07/2018

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