बदलके सारे दीवार-ओ-दरों को

बदलके सारे दीवार-ओ-दरों कोकर गया वो पराया अपने घरों को।कहाँ तक उड़े चले जाते हैं देखेंआस्मां मिला है टूटे हुए परों को।बहा है लहू किसके सरों का, देखोउठाकर फेंके हुए इन पत्थरों को।क्या पता कि वोह सोया भी था  कि नहींछोड़ गया है वो गूँगे बिस्तरों को।बहुत लहूलुहान हो गया है बिचारासमझाये कोई तो अब ठोकरों को।ये कलियाँ शबनम भरी सिसकती रहींकहीं काँटे ना चुभ जायें भ्रमरों को।वोह मुस्कान तेरे लबों को छूकरचूम चूम जाती है मेरे अधरों को।…. भूपेन्द्र कुमार दवे00000

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

4 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 06/07/2018
    • bhupendradave 06/07/2018
  2. C.M. Sharma 06/07/2018
    • bhupendradave 06/07/2018

Leave a Reply