सुकून – डी के निवातिया

सुकून

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जब मन उदास होता है यादो के बादल घुमड़ आते है गरजते है, बरसते है, तड़पाते है, डराते है,तन्हा मन घबराने लगता है फिर,झूम-झूम कर, इठलाती, बलखाती वर्षा आती है, अपनी भीनी भीनीं फुहारों से संचित कर, स्नेह के पुष्प, फिर महकने लगते है मिल जाता है थोड़ा सुकून !!

!!!डी के निवातिया

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10 Comments

  1. kiran kapur gulati 04/07/2018
    • डी. के. निवातिया 25/07/2018
  2. Shishir "Madhukar" 05/07/2018
    • डी. के. निवातिया 25/07/2018
  3. Dr Swati Gupta 05/07/2018
    • डी. के. निवातिया 25/07/2018
  4. C.M. Sharma 06/07/2018
    • डी. के. निवातिया 25/07/2018
  5. Rajeev Gupta 09/07/2018
    • डी. के. निवातिया 25/07/2018

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