काश! कह देता तुम्हे

काश! कह देता तुम्हेतुम मेरे सामने ही तो थीमैं कह देता तुम्हेकी तुम मेरे दिल के स्पॉट पे दस्तक दे चुकी होबता देता तुम्हे कीकॉलेज के पहले दिन से ही अच्छी लगने लगी मुझेजाहिर कर ही देता ग़र जज्बात अपनेक्या पता तुम कबूल ही कर लेती मुझेऔर मेरे आँखों में बसेमेरे बेपरवाह इश्क कोकाश !कह देता तुम्हे..की मैंने अपने भीतर शीशमहल बना रखा हैसिर्फ तुम्हारे अक्श को कैद करने के लिएमुझे बता देना चाहिए था की तुम्हारे कानो में सजे कर्णफूल धड़का देते हैं मुझेतुम्हारे गाल पर मौजूद तिल तड़पा देते हैं मुझेतुम्हारे उड़ते केश बहका देते हैं मुझेदे देता तुम्हेमहकते गुलाब जो अब सूख से गए है किताबो मेंभेज देता वो सारे ख़त तुम्हारे पते परजो बंद है मेरे दिल के आलमारी में—अभिषेक राजहंस

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3 Comments

  1. Bindeshwar Prasad sharma 04/07/2018
  2. डी. के. निवातिया 04/07/2018
  3. Shishir "Madhukar" 05/07/2018

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