कुलदीपक बन के जलना तुम….सी.एम्. शर्मा….

आस का दीपक जल रहा है….तेल विश्वास का भरा हुआ है…लौ दीये की यूं तेज भरी है…जैसे सूरज तम हर रहा है….माथे बिंदिया माँ है लाल लगाई….आभा विश्वास की मुख पे छाई…विजयी मुस्कान यूं छटा बिखेरे…जैसे बिजली बादलों को चीरे….आँखें भविष्य को बींध रही हैं….जग को चनौती ये दे रही हैं….हार का दर मैं छोड़ आयी हूँ…विजय अभियान मैं लिख रही हूँ….दुनियां के हर कहर से बचाये….माँ बच्ची को आँचल में छिपाए….थपकी उसे दिए जा रही है….साथ में लोरी ये सुना रही है…..बेटी तू दिल का टुकड़ा है मेरा….तुझसे शुरू खत्म हर पल मेरा….जंग शुरू जो की है मैंने, उसका…परचम फहराना अब काम तेरा…कुलदीपक बन के जलना तुम…मन तिमिर जहां का हरना तुम…नापाक हाथ छूएं दामन जो तेरा…दुर्गा बन उन्हें संहारना तुम….कुलदीपक बन के जलना तुम….कुलदीपक बन के जलना तुम…\/मौलिक – सी.एम्. शर्माचित्रकार को वंदन करती मेरी रचना…..

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12 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 02/07/2018
    • C.M. Sharma 02/07/2018
      • Shishir "Madhukar" 02/07/2018
        • C.M. Sharma 02/07/2018
  2. Dr Swati Gupta 02/07/2018
    • C.M. Sharma 02/07/2018
  3. Anu Maheshwari 02/07/2018
    • C.M. Sharma 04/07/2018
  4. डी. के. निवातिया 03/07/2018
    • C.M. Sharma 04/07/2018
  5. kiran kapur gulati 04/07/2018
    • C.M. Sharma 04/07/2018

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