तुम मेरे लिए…

तुम्हे कैसे बताऊँतुम मेरे लिए क्या होतुम सिर्फ मेरी जरुरत तो नहीं होतुम से ही तो मेरे घर का आँगन हैआँगन में गूजती किलकारी हैतुम तो मेरी आँखों में बसी नींद होनींद में डूबा हुआ सपना होतुम तो मेरे लिए सुबह की चाय होचाय में घुली शक्कर होतुम्हे कैसे बताऊँतुम मेरे लिए क्या होतुम मेरी आदत तो नहीं होतुम मेरे घर की चौखट होचौखट पे सजा भाग्यकलश होतुम मेरे लिए दर्पण होदर्पण में मेरे लिए सजती नूर-ए अक्श होतुम मेरे लिए खुदा होखुदा की इबादत हो —अभिषेक राजहंस

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2 Comments

  1. davendra87 30/06/2018
    • Abhishek Rajhans 01/07/2018

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