मुहब्बत – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

मुहब्बत में मुझसे कैसा करार हो गयामिले थे हम अपना समझ के रार हो गया।अब तो संभल कर ही होगा देखना उसेपहले ही झलक में मुझे बुखार हो गया।प्यार में तकरार तो ऐसे आते रहेंगेइरादा पाक था इसलिए इकरार हो गया।उनका दकियानूसी मुझे आती नहीं समझउनके सादगी के लिए इंतजार हो गया।कडवी बोलती, गुस्सा और डर दिखाती हैहंसी होठ का देखकर बेजार हो गया।दिल को समझना समझाना मुझे आ गयारंग में आई दिवानगी दीदार हो गया।गुफ्तगू चलती रही ऐसे हम एक हो गयेभेद कुछ भी न रहा मन में प्यार हो गया।

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

2 Comments

  1. C.M. Sharma 28/06/2018
  2. डी. के. निवातिया 28/06/2018

Leave a Reply