हर दरकार फिर स्वीकार हो जाए – शिशिर मधुकर

आँख खुलते ही जो रुख का तेरे दीदार हो जाए दवा-दारु बिना फिर ठीक ये बीमार हो जाए ज़रा सा मुस्कुरा के तू अगर बाहों में भर लेगी वो ही मेरे लिए सबसे बड़ी तीमार हो जाए लाख दुश्वारियां हों तुम जो मेरा दिल ना तोड़ोगी भला कैसे कोई फिर बीच में दीवार हो जाए आखिरी सांस तक जो साथ तुम मेरा ना छोड़ोगी अमर फिर तो ज़माने भर में ये मीनार हो जाए अगर तू हाथ मेरा थाम ले हर एक विनती में मधुकर की हर दरकार फिर स्वीकार हो जाए शिशिर मधुकर

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14 Comments

  1. C.M. Sharma 26/06/2018
    • Shishir "Madhukar" 26/06/2018
  2. ANU MAHESHWARI 26/06/2018
    • Shishir "Madhukar" 27/06/2018
  3. Dr Swati Gupta 27/06/2018
    • Shishir "Madhukar" 27/06/2018
  4. Bhawana Kumari 27/06/2018
    • Shishir "Madhukar" 27/06/2018
  5. Bindeshwar prasad sharma 27/06/2018
    • Shishir "Madhukar" 27/06/2018
  6. Rajeev Gupta 27/06/2018
    • Shishir "Madhukar" 27/06/2018
  7. डी. के. निवातिया 28/06/2018
    • Shishir "Madhukar" 28/06/2018

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