सरगम – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

 कोयल सी आवाज है तेरीजन्नत सा सरताज ये तेरा।तुम मृदुल वसंत के जैसीपरियों से अंदाज ये तेरा।तेरी अनुपम राग – रागिनीसुख सागर मिजाज ये तेरा।तुम आमोद प्रमोद संगिनीकितना सुंदर नाज ये तेरा।तुम वाटिका चमन बाग कीनयन मृग सरफ़राज़ ये तेरा।तुम तरुणी सी अलंकार होसारे जहाँ पर राज ये तेरा।तुम विभूति श्रृंगार बदन काहर अदा अल्फाज़ ये तेरा।तुम अमृत मृत संजीवनीहर उल्फत समाज ये तेरा।

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3 Comments

  1. C.M. Sharma 25/06/2018
  2. Bindeshwar Prasad sharma 25/06/2018
  3. Dr Swati Gupta 27/06/2018

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