दयार – ए- दिल- बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

दयार ए दिल में महफूज़ रखा हैतुमने क्यों हमसे उसे दूर रखा है।आँखों के बहाने तो कुछ और हैंन जाने हमसे क्यों गुरूर रखा है।आँखें मिली है दिल भी मिलने दोआप इसको क्यों मजबूर रखा है।उम्र तो अब आई प्यार करने कीअपने सपने का वजूद रखा है।प्यार का इजहार मैंने किया हैखिदमत में आपकी दस्तूर रखा है।मुझे मालूम शर्म आती है तुझकोइसलिए ख्याल ए भरपूर रखा है।तिश्नगी ए इश्क में दोनों बह गयेखुदा के तरफ से मकबूल रखा है।दयार – इलाका – स्थान, महफूज़ – गुप्त, दस्तूर – नियम, मकबूल – स्वीकृत।

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  1. C.M. Sharma 25/06/2018

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