मैं लिखूंगी प्यार

मैं लिखूंगी प्यार उस दिन जिस दिन मनुष्यों की ईर्षा की आग से सुख  जाएंगेपेड़-पौधों की हरे पत्ते उजड़ने आरम्भ होगा जंगल औरधँसना शुरू होगा ऊँची पहाड़ी मैं लिखूंगी प्यार उस दिन जिस दिन नदी में पानी के बदले बहेंगे लाल खून और मनुष्यों की आंसू मैं लिखूंगी प्यार उस दिन जिस दिन बंजर हो जाएगी धरती अन्न पैदा नहीं होंगे सर ऊँचा कर खड़े रहेंगे कैक्टस लोगों की अभिलाषा और आनंद मर जायेंगे साँस फूलने लगेगा हिंसा की काली धुँवा से मैं लिखूंगी प्यार उस दिन जिस दिन तुम मुझे प्यार नहीं करोगे प्यार मेरी कडुआ  लगेगाउसी दिन चला जाऊंगा तुम्हे छोड़कर दूर देश को छोड़कर जाऊंगा तुम्हारे लिए मीठी प्यार ताकि महसूस कर सको  प्यार करने का दर्द

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4 Comments

  1. Bindeshwar prasad sharma 23/06/2018
  2. डी. के. निवातिया 23/06/2018
  3. C.M. Sharma 25/06/2018
  4. Bhawana Kumari 25/06/2018

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