अफसोस – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

हम जो हार गये दोष हमारे थेकोशिश न करी अफसोस हमारे थे।शायद समझ पाया था नहीं जिंदगीजीत के अक्ल बेहोश हमारे थे।ठोकरें लगी थी अब आँखें खुल गयीजो हुआ मन के उद्घोष हमारे थे।अब चौकन्ना हूँ समझ लिया दुनियाफिसल गये थे जो रोष हमारे थे।नया खून था बहुत नादान थे हममति इस उम्र में मदहोश हमारे थे।मिल गयी मंजिल जो मुझे पाना थाभटके थे जो आक्रोश हमारे थे।

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  1. kiran kapur gulati 23/06/2018

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