धनक—संकलनकर्ता: महावीर उत्तराँचली

(1.)साथ रखता हूँ हमेशा तिरी यादों की धनकमैं कभी ख़ुद को अकेला नहीं होने देता—नासिर ज़ैदी(2.)सुना है बावजूद-ए-ज़ोर हम नेधनक रावण से भी टूटी नहीं है—मिस्दाक़ आज़मी(3.)ज़मीं से आसमाँ तक फैल जाएँधनक में ख़्वाहिशों के रंग बिखरे—महावीर उत्तरांचली(4.)किसी के मरमरीं आईने में नुमायाँ हैंघटा बहार धनक चाँद फूल दीप कली—शहज़ाद क़ैस(5.)सिंदूर उस की माँग में देता है यूँ बहारजैसे धनक निकलती है अब्र-ए-सियाह में—अरशद अली ख़ान क़लक़(6.)पर्दा शराब-ए-इश्क़ का मंसूर से खुलानद्दाफ़ था कि पम्बा-ए-मीना धनक गया—मिर्ज़ा मासिता बेग मुंतही(7.)नाम-ओ-नुमूद हफ़्त-जिहत सौंप कर मुझेसूरज धनक में धूल बना देखता रहा—अफ़ज़ाल नवेद(8.)जाने किस तरह ख़लाओं में धनक बनती हैचाँद की रंग भरी झील के उस पार हवा—रफ़ीक़ ख़ावर जस्कानी(9.)धुआँ धनक हुआ अँगार फूल बनते गएतुम्हारे हाथ भी क्या मोजज़े दिखाने लगे—अख़्तर रज़ा सलीमी(10.)मह-रुख़ों की बज़्म में शिरकत नज़र आने लगीऔर तसव्वुर में धनक के रंग लहराने लगे—जमील उस्मान(11.)उसे ख़बर नहीं सूरज भी डूब जाता हैहसीं लिबास पे नाज़ाँ धनक बहुत है अभी—अशफ़ाक़ अंजुम(12.)ये छटने वाले हैं बादल जो काले काले हैंइसी फ़ज़ा में वो रौशन धनक निखरती है—मख़मूर सईदी(13.)कहीं दूर साहिल पे उतरे धनककहीं नाव पर अम्न-बादल चले—शाहिदा तबस्सुम(14.)नशात-ए-क़ुर्ब के लम्हों में उस की अंगड़ाईउभर के ख़ाक-ए-बदन से धनक धनक जाए—अकबर हमीदी(15.)सर-ए-निगाह भी ‘राशिद’ धनक धनक पैकरपस-ए-सहाब भी इक चाँद चाँद साया है—राशिद मुराद(16.)धनक धनक मिरी पोरों के ख़्वाब कर देगावो लम्स मेरे बदन को गुलाब कर देगा—परवीन शाकिर(17.)मेरे चारों तरफ़ लबों की धनकउस ने लगते ही अंग उड़ाई थी—अफ़ज़ाल नवेद(18.)चाँद तारे शफ़क़ धनक आकाशइन दरीचों को कुंजियाँ दे दो—नासिर जौनपुरी(19.)थी धनक दूर आसमानों मेंऔर हम थे शिकस्ता-पर बाबा—हामिद सरोश(20.)चाँद तारे शफ़क़ धनक ख़ुशबूसिलसिला ये उसी से मिलता है—साबिर बद्र जाफ़री(21.)किसी हिज्र-शाल की धज्जियाँ मुझे सौंप कर वो कहाँ गयावो धनक धनक से कता हुआ वो किरन किरन से बुना हुआ—क़य्यूम ताहिर(22.)कभी ख़ूँ से रंगीं भी हो चश्म-ए-तरधनक भी नज़र आए बरसात में—जावेद शाहीन(23.)निगार-ए-गुल-बदन गुल-पैरहन हैधनक रक़्साँ चमन-अंदर-चमन है—सिकंदर अली वज्द(24.)आईने रंगों के ख़ाली छोड़ जाएगी धनकहैरतें रह जाएँगी मंज़र जुदा हो जाएगा—रशीद कामिल(25.)हर एक मौज हो उठती जवानियों की धनकबनूँ तो ऐसे समुंदर का मैं किनारा बनूँ—फ़ारिग़ बुख़ारी(साभार, संदर्भ: ‘कविताकोश’; ‘रेख़्ता’; ‘स्वर्गविभा’; ‘प्रतिलिपि’; ‘साहित्यकुंज’ आदि हिंदी वेबसाइट्स।)

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

Leave a Reply