इक मेरे रहने से क्या होता है

इक मेरे रहने से क्या होता हैतेरे बिन खाली मकां होता हैजो कह न सके हिम्मत से सचमेरी नजर में वो बेजुबां होता हैजंग है जुर्म के वहशी दरिंदो सेदेखें साथ में कौन खड़ा होता हैपरिंदों का पता सुबह पूछती हैमेरे होठों पे ताला पड़ा होता हैसुना है शहर भी कभी गांव थाअब जिक्र नही उसका होता हैतुम गए मेरा “मैं” भी चला गयाजीने का नही हौसला होता हैदीवार के पार फूल भी खिले हैंनफ़रत-ए-नजर का पर्दा होता है । देवेंद्र प्रताप वर्मा”विनीत”

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3 Comments

  1. Bindeshwar prasad sharma 21/06/2018
  2. C.M. Sharma 21/06/2018
  3. Shishir "Madhukar" 22/06/2018

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