” गुल्लक “

” गुल्लक “

बन्द देह की गुल्लक में अपनी काया हैछोडो दौलत का मोह झूठी यह माया हैहसरतों से उपर के सपने होते है झूठेलालच से उत्पन्न हुई ये कैसी छाया हैनिर्धन को न मिलती दो वक्त की रोटीखेल दौलत का यह किसने सिखाया हैआसमां की चादर में लिपटी ये गरीबीघर धनवालों का आज किसने सजाया हैमासूमियत भी करती हुई बाल मजदुरीघूट जहर का मासूमों को किसने पिलाया है_________________अभिषेक शर्मा

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6 Comments

  1. डी. के. निवातिया 19/06/2018
  2. ANU MAHESHWARI 19/06/2018
  3. kiran kapur gulati 20/06/2018
  4. kiran kapur gulati 20/06/2018
  5. Bindeshwar prasad sharma 21/06/2018
  6. Shishir "Madhukar" 22/06/2018

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