हम ना थकते है – शिशिर मधुकर

राहों में जिन पे तुम मिले उन पे भटकते हैं मुद्दत हुई तुम्हें ढूंढते पर हम ना थकते है अमवां पे बौर आ गया पुरवाई जब चली फल मगर पकता है जब शोले दहकते हैं बरसेगा मेघा झूम के धो देगा सारा मैल रातों में फिर तुम देखना जुगनूं दमकते हैं फूल ना खिलने दिए कलियाँ ही तोड़ दीं पछता रहे हैं अब कहें गुल ना महकते हैं आँखों से पीनी छोड़ दी मधुकर शराब जो कैसे भी जाम पी ले अब हम ना बहकते हैं शिशिर मधुकर

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6 Comments

  1. kiran kapur gulati 17/06/2018
    • Shishir "Madhukar" 17/06/2018
  2. Dr Swati Gupta 17/06/2018
    • Shishir "Madhukar" 18/06/2018
  3. C.M. Sharma 18/06/2018
    • Shishir "Madhukar" 18/06/2018

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