उदासी से भरा ये दिल हमारा देखिए

या तो समंदर में , वबंडर का नजारा देखिएया उदासी से भरा , ये दिल हमारा देखिए

गर जिंदगी है खुशनुमा , तो कुछ ऐसा करके देखिएदिल लगाओ तो किसी से , फिर खेल सारा देखिए

इस समंदर की तरह , गहराई भी मिल जाएगीझाँक कर आँखों में मेरी , ये पानी खारा देखिए

मन्नतें पूरी हो उनकी , जो भी खुदा से मांग लेढाला है खुद को मैंने ऐसे , एक टूटा तारा देखिए

अज़ीयत ने दिखाया दृश्य जो , कौन अपना या परायादेखकर इस दृश्य को , मुख में विष की धारा देखिए

क्यों बिछड़ते जा रहे है , एक ही खुदा के लोग येखुद के ही स्वार्थ पर , इनका चढ़ता पारा देखिए

कवि – मनुराज वार्ष्णेय

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  1. kiran kapur gulati 17/06/2018

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