प्रेम की लौ – डी. के. निवातिया

कोई कली जब फूल बनकर महक उठती है,उसे देख तबियत भंवरे कि चहक उठती है,महकने लगता है अहले चमन खुशबू से,सूने दिल मे भी प्रेम की लौ दहक उठती है !!।।।डी. के. निवातिया………@

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8 Comments

  1. ANU MAHESHWARI 15/06/2018
    • डी. के. निवातिया 23/06/2018
  2. Bindeshwar prasad sharma 15/06/2018
    • डी. के. निवातिया 23/06/2018
  3. kiran kapur gulati 17/06/2018
    • डी. के. निवातिया 23/06/2018
  4. Dr Swati Gupta 17/06/2018
    • डी. के. निवातिया 23/06/2018

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