प्रीत के फेरे – शिशिर मधुकर

तुम्हें दिल दे दिया मैंने नहीं कुछ पास अब मेरे मेरी साँसों की खुशबू बस चुकी है साँसों में तेरेदूरियां अब कभी हमको परेशां कर न पाएंगी हवाएं साथ में अपने हसीं पैग़ाम लाएंगी ज़माना सोच ले कुछ भी मगर समझेगा वो कैसे लिए हैं साथ में हमनें तो केवल प्रीत के फेरे तुम्हें दिल दे दिया मैंने नहीं कुछ पास अब मेरे मेरी साँसों की खुशबू बस चुकी है साँसों में तेरेतेरे बिन ज़िन्दगी में अब ना कोई रंग दिखता है मुकद्दर लिखने वाला देखो क्या तकदीरें लिखता है कोई बिन मांगें पा जाता है उजले रूप का सागर जिसकी खातिर सजे रहते हैं कितने उम्मीदों के डेरे तुम्हें दिल दे दिया मैंने नहीं कुछ पास अब मेरे मेरी साँसों की खुशबू बस चुकी है साँसों में तेरेमुझे अब डर नहीं लगता तू मेरे साथ है जब से यूँ ही तन्हा खड़ी थी मैं पसारे बाहों को कब से गले तुमने लगाया मुझको और वो आग दे डाली जलाकर पास मैं आती हूँ नफरत के सभी घेरे तुम्हें दिल दे दिया मैंने नहीं कुछ पास अब मेरे मेरी साँसों की खुशबू बस चुकी है साँसों में तेरेशिशिर मधुकर

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8 Comments

  1. C.M. Sharma 14/06/2018
    • Shishir "Madhukar" 15/06/2018
  2. डी. के. निवातिया 15/06/2018
    • Shishir "Madhukar" 15/06/2018
  3. ANU MAHESHWARI 15/06/2018
    • Shishir "Madhukar" 15/06/2018
  4. Bindeshwar prasad sharma 15/06/2018
    • Shishir "Madhukar" 17/06/2018

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