प्रेम चाहे पलों का हो- शिशिर मधुकर

वो तो परियों की रानी थी रूप उसका सलोना था किसी भी हाल में लेकिन उसे मेरा ना होना था मुझे मिलती थी वो जब भी सदा कुछ कहना चाहती थी उसके दिल में लगा मुझको कहीं मेरा भी कोना था। मुझे मिलती थी वो जब भी मुख पे मुस्कान होती थी साथ जिसका करे शीतल वो ऐसा प्रेम मोती थी मेरे दिल के अँधेरे दूर करने को मिली हो ज्यों वो तो भगवान की भेजी हुई एक दिव्य ज्योति थी। प्रेम चाहे पलों का हो कभी भूला ना जाता है जुड़े हों तार जिससे दिल के वो साथी याद आता है कोई मिलता नहीं यूँ ही सफर में जान लो तुम भी कहीं भूला हुआ जन्मों का समझो कोई नाता है। शिशिर मधुकर

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4 Comments

  1. Dr Swati Gupta 11/06/2018
    • Shishir "Madhukar" 15/06/2018
  2. C.M. Sharma 13/06/2018
    • Shishir "Madhukar" 15/06/2018

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