मैंने जिंदा रखा है

दर्पण मेरे कमरे कासमर्पित है तुम्हारे अक्श के इंतज़ार मेंतुम्हारे वजूद को अब तकजिन्दा रखा है मैंनेमैंने अपनी रूह मेंमैंने अभी भी जिंदा रखा है खुद कोतुम्हारे इंतज़ार मेंतुम्हारा इनकार नागवार है मुझेतुम्हारे आलिंगनपाश के जकड़न कोजिन्दा रखा है मैंने अपने जिस्म मेंतुम्हारे पायल की आवाज हीएक मात्र संगीत है मेरे जीवन कातुम्हारी यादो की तस्वीर हीएकमात्र सहारा है मेरे जीवन कातृष्णा प्रेम का वेदना विरह का अब सहा ना जाए प्रियेमौत अगर निश्चित ही हैतुमसे मिलन के लिएतो लौट आओ एक बारमैने जिन्दा रखा है खुद कोतुम्हारे हाथो मौत पाने के लिए—-अभिषेक राजहंस

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2 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 10/06/2018
  2. Dr Swati Gupta 11/06/2018

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