असर होता है कुछ ऐसा – शिशिर मधुकर

ना तेरे बोल सुनता हूँ ना ही खुशबू अब आती है तेरी आँखों की वो मस्ती मुझे हरदम सताती है हया से नज़रों का झुकना और फिर मुस्कुरा देना तेरी परियों सी वो सूरत मुझे अब भी लुभाती है भले ही कुछ कहो ना तुम भले गुमसुम से बैठे हो सदा दिल से उठे जो नाम तो मेरा बुलाती है तेरी यादों के जादू का असर होता है कुछ ऐसा तू ही तो ख्वाब में आकर सदा मुझको सुलाती है ज़माना कर रहा कुछ भी और हम कर रहे कुछ भी मुहब्बत देख ले मधुकर धर्म अपना निभाती है शिशिर मधुकर

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8 Comments

  1. C.M. Sharma 06/06/2018
    • Shishir "Madhukar" 07/06/2018
  2. Bhawana Kumari 06/06/2018
    • Shishir "Madhukar" 07/06/2018
  3. Dr Swati Gupta 07/06/2018
    • Shishir "Madhukar" 07/06/2018
  4. डी. के. निवातिया 07/06/2018
    • Shishir "Madhukar" 07/06/2018

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