पर्यावरण

पर्यावरण*************खड्ग उठाए वो कौन है?क्यों तू अब भी मौन है ।प्रदूषण बन खर-दूषणभेद रहा ये आवरण।छिन्न-भिन्न पर्यावरणप्राण लीलता वातावरणमृत्यु की तू छोड़ शरणक्रांति का तू कर वरणजीवन तुम्हें है पुकारता !वादों की टंकार छोड़ ।कोशिशों की बांध डोर ।अब तीर चढ़ा तू कर्म कान भटक -न थकतू बन सजगबेधड़क तू बन जा वीर !भविष्य की तू बन जा नींव ।।।।मुक्ता शर्मा ।।

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9 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 06/06/2018
    • mukta 06/06/2018
  2. C.M. Sharma 06/06/2018
    • mukta 06/06/2018
  3. Bhawana Kumari 06/06/2018
  4. mukta 06/06/2018
  5. Dr Swati Gupta 07/06/2018
  6. डी. के. निवातिया 07/06/2018
  7. Rajeev Gupta 08/06/2018

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