माँ अब बूढ़ी लगने लगी है ।।

माँ अब बूढ़ी लगने लगी है—********************माँ के जगने सेजगता था घर-आंगन ।।सूर्य रश्मि छिटक कर ।धूल पर बिखर कर ।कर सुरम्य वातावरणबन जाती थी पावन।।अब वो माँ निस्तेज सी जगने लगी है।माँ अब बूढ़ी लगने लगी है ।।बिट्टू का नाम ले-लेकर ।सीमा को आवाज दे-देकर ।प्यार का रस बिखेर कर ।रौनकें भरती थी जोअब उसकी जुबानकुछ शिथिल होने लगी है।कमर थोड़ी सी झुकने लगी है।माँ अब बूढ़ी लगने लगी है ।।मस्त-मस्त थी पवन ।भीनी-भीनी थी सुगंध ।पकवानों में अमृत को घोल।भिखारी के भी पूरे करती बोल।डर-डर के चौंके में चढ़ने लगी है।चाय में चीनी कम पड़ने लगी है ।।माँ अब बूढ़ी लगने लगी है ।।नसीहतों का बोझ उठा।सास की हर बात सुन ।पति के सब नख़रे उठा।उलझनों को भी लेती बुन।अब सारा छोड़ बांकपनउसकी चुप्पी और बढ़ने लगी है ।।जुबान बहू की छलनी करने लगी है ।।बिट्टू के भी सिर चढ़ने लगी है ।।माँ अब बूढ़ी लगने लगी है ।।रानी इस घर-नगर की ।दिखती नहीं भई !,गई किधर है ?टूटा चश्मा कमजोर नज़र है ।वृद्धाश्रम की विराना डगर है।अब बीते कल में रहने लगी है ।अकेली! पगली! क्या रटने लगी है ?माँ अब बूढ़ी लगने लगी है ।।।।मुक्ता शर्मा ।।

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

10 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 06/06/2018
  2. mukta 06/06/2018
  3. C.M. Sharma 06/06/2018
    • mukta 06/06/2018
  4. Bhawana Kumari 06/06/2018
    • mukta 06/06/2018
  5. mukta 06/06/2018
  6. Dr Swati Gupta 07/06/2018
  7. डी. के. निवातिया 07/06/2018
  8. Rajeev Gupta 08/06/2018

Leave a Reply