दोहे – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

-: 01 :-माया के बाजार में, बिकते रहे जमीरलोग देखते रह गये, भर भर आँखें नीर। -: 02 :- भागो मत मेहनत से, मत करना अब योग अपना काम जो कर दिए, जीवन रहा निरोग। -: 03 :-कहाँ रहे भगवान अब, बनके वैद्य हकीम खूब तिजोरी भर रहे, रोगी बने रहीम। -: 04 :-सात रंग संसार का, पंचम तत्व शरीर अलग अलग सब देखिये, अलग अलग तकदीर। -: 05 :-मन पुलकित तब होत है जब ह्दय हो प्यार जैसे मीरा बन गई मन मोहन की हार। -: 06 :-गीत गजल मन मोहनी, छंद मुक्तक सु ज्ञान चौपाई दोहा भली, कविता सब की जान। -: 07 :-तीरथ है भगवान का, मात पिता के द्वार इनकी सेवा कीजिये देंगे तुमको तार। -: 08 :-बेटी कुल की लाज है बेटा कुल का शान बेटा वंश बढ़ा रहा है बेटी बरदान। -: 09 :-बुरी नजर से देखना, बहुत बड़ी अपराध बदल दो अपनी नीयति, मत बन गीदड़ बाघ। -: 10 :-आक़ा तेरे पास में, खोज रहे तुम दूर अंंतस मन में झाँक लो, आँखों के वो नूर। -: 11 :-यह अंबर की चाँदनी, जैसे हो चितचोर धीरे चंदा चल रहा, बादल के उस ओर। -: 12 :-बिटिया जो घर आ गयी, खुशी मनाओ आजबेटा से है कम नहीं , घर के दोनो साज। -: 13 :-जितनी है दुनिया बड़ी ,उससे क्या कम लोग बदल रहा मन मनुज का,लोभ बन गया रोग। -: 14 :-मनुष्य के आयु का निराकरण – कलियुग के अंतिम चरण में… मनुष्य की आयु मात्र 10 से 5 वर्ष। सतयुग आयु लाख बरस, त्रेतायु दस हजार द्वापर घट हजार भये, कलियुग सौ में भार। -: 15 :-करो जितना करना है, ये काया है कांच जाने कब चटक जाये, मानो बिलकुल सांच । -: 16 :-कलियुग में श्री राम का, भजन रहेगा सार छल – कपट से दूर रहो, होगा नैया पार।

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6 Comments

  1. mukta 05/06/2018
  2. Shishir "Madhukar" 06/06/2018
  3. C.M. Sharma 06/06/2018
  4. Bhawana Kumari 06/06/2018
  5. Dr Swati Gupta 07/06/2018
  6. डी. के. निवातिया 07/06/2018

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