जिसका हर होंठ पे तराना है…सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

(ये ग़ज़ल श्री नक्श ल्यालपुरी जी की लिखी ग़ज़ल “ये मुलाक़ात इक बहाना है….प्यार का सिलसिला पुराना है’ पर आधारित है….फिल्म खानदान…म्यूजिक ख़्याम साहिब जी…)शमअ से कह रहा दिवाना है….जल के तुझमें मुझे समाना है…..तीर नज़रों के चल चुके अब तो….दर्द सह कर भी मुस्कुराना है….जान निकले खुदा उसी खातिर…जिनकी ज़ानें मेरा सिरहाना है….चाँदनी रात जल रही कितनी….दिल हुआ फिर कहीं विराना है….चाँद को आज फिर छुआ मैंने…..कोशिशों से करीब लाना है…..की समर्पित ग़ज़ल उसे ‘चन्दर’…जिसका हर होंठ पे तराना है….*प्यार का सिलसिला पुराना है…ये मुलाक़ात इक बहाना है*….\/सी. एम्. शर्मा (बब्बू) ज़ानें – गोद का भाग

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20 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 04/06/2018
    • C.M. Sharma 06/06/2018
  2. Anu Maheshwari 04/06/2018
    • C.M. Sharma 06/06/2018
  3. Bhawana Kumari 04/06/2018
    • C.M. Sharma 06/06/2018
  4. Bindeshwar prasad sharma 04/06/2018
    • C.M. Sharma 06/06/2018
  5. Dr Swati Gupta 04/06/2018
    • C.M. Sharma 06/06/2018
  6. mukta 05/06/2018
    • C.M. Sharma 06/06/2018
  7. डी. के. निवातिया 07/06/2018
    • C.M. Sharma 08/06/2018
  8. Saviakna 08/06/2018
    • C.M. Sharma 08/06/2018
  9. kiran kapur gulati 18/06/2018
    • C.M. Sharma 18/06/2018
  10. Love shayari 30/06/2018
    • C.M. Sharma 30/06/2018

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