प्यारी निशा

।।प्यारी निशा।।गाड़ी रुकने का शोर हुआ।मन व्याकुल उस ओर हुआ।दरवाजा खुला औरउतरी निशा !!मन में कौतूहल सा हुआ।तभी डाक्टर साहिबा ने हाथ हिला।सुबह का अभिवादन था किया।हमने भी मुस्कान बिखेरीकोशिश उनकी परमन हर्षित हुआ।निशा के सिर पर हाथ फिरा।हमने उसकी किस्मत परगर्व किया।तभी गाड़ी मुड़ी औरसंदेश मिला ।शाम को भी आऊंगीमेरी प्यारी निशा !!चलो जैसे-तैसे समय हुआ।आठवीं का पेपर खत्म हुआ।आई गाड़ी ! पर कहाँ थी निशा ?बच्चों से ढुंढ़वायाखुद पड़ताल किया।धूल उड़ाती गाड़ी उड़ी।गाँव के कोने तक भी मुड़ी।पता लगने पर मनउल्लसित हुआ ।हे रब! सीमा,रजनीका भी भाग्य खिला।हुई सुबह फिर दिखी निशा ।बाजू पकड़ एतराज़ किया।बिन बताए गई थी कहाँ?बे अक्ल ! तेरा तो हाल बुरा !!बाजू पर थी चमकतीसिलवटें बेंत की ।।मुख पर सूजनधंसी हुई आँखों मेंआँसुओं की लहर थी तैरती ।बिन कुछ बोले बोल गई थी।है दिए तले अँधेराराज़ यह खोल गई थी।बच्चों ने हाल सुनाया था।माँ-बाप ने पीट करआंगन में घसीट करगाड़ी में झोंक करईमानदारी का पाठ पढ़ाया था ।उधर डाक्टर साहिबा कीअकड़ और बढ़ गई थी।डाक्टर साहिबा केशिशु के माथेपाप जड़ गई थी।फिर एक मासूम कलीपढ़े-लिखे अमीरों कीभेंट चढ़ गई थी ।।।।मुक्ता शर्मा ।। 

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12 Comments

  1. C.M. Sharma 04/06/2018
    • mukta 04/06/2018
  2. Anu Maheshwari 04/06/2018
    • mukta 04/06/2018
  3. Shishir "Madhukar" 04/06/2018
    • mukta 04/06/2018
      • Shishir "Madhukar" 04/06/2018
        • mukta 05/06/2018
  4. Bhawana Kumari 04/06/2018
    • mukta 04/06/2018
  5. Bindeshwar prasad sharma 04/06/2018
    • mukta 04/06/2018

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