अमृत ही मिल गया -शिशिर मधुकर

देखा तेरी निगाह ने गुलशन भी खिल गयाऐसा लगा प्यासे को ज्यूँ अमृत ही मिल गयाइस प्यार और विश्वास की ताकत अजीब हैआहें भरी मैंने तो लो पत्थर भी हिल गयासीने का घाव जो कभी सूखा ना किसी बिधितुम मिले तो चुटकियों में वो भी सिल गयाबाहों में तुमने घेर कर जब मन की बात कीआँखों के बाँध तोड़ कर बहता सलिल गयाक्यूँ धड़कने बन जाएगा मधुकर कोई पल मेंमैं किस तरह समझाऊं कहता ये दिल गयाशिशिर मधुकर

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12 Comments

  1. Bhawana Kumari 02/06/2018
    • Shishir "Madhukar" 02/06/2018
  2. mukta 04/06/2018
    • Shishir "Madhukar" 04/06/2018
  3. C.M. Sharma 04/06/2018
    • Shishir "Madhukar" 04/06/2018
  4. Anu Maheshwari 04/06/2018
    • Shishir "Madhukar" 04/06/2018
  5. Bindeshwar prasad sharma 04/06/2018
    • Shishir "Madhukar" 04/06/2018
  6. Dr Swati Gupta 04/06/2018
    • Shishir "Madhukar" 04/06/2018

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