तभी संजोग बनते हैं – शिशिर मधुकर

लाख कोशिश करी मुझको मगर ना चैन आता है कोई ख़्वाबों में आकर रात भर मुझको सताता है ज़माना बन गया दुश्मन कहीं जीने नहीं देता ख्यालों में सदा रहकर कोई कसमें निभाता है कई जन्मों का रिश्ता हो तभी संजोग बनते हैं यूँ ही कोई कभी इन सांसों में थोड़ी समाता है जो दिल में दर्द उठता हो तन्हाई घेर लेती हो समझ लो आज भी चुपके से वो तुमको बुलाता है हंसी चेहरे पे रहती है होंठ पर कुछ नहीं कहते वो दिल की पीर नज़रों से ही तो मधुकर सुनाता है शिशिर मधुकर

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17 Comments

  1. C.M. Sharma 02/06/2018
    • Shishir "Madhukar" 02/06/2018
  2. Bindeshwar prasad sharma 02/06/2018
    • Shishir "Madhukar" 02/06/2018
  3. Bhawana Kumari 02/06/2018
  4. Shishir "Madhukar" 02/06/2018
  5. mukta 04/06/2018
    • Shishir "Madhukar" 04/06/2018
  6. Anu Maheshwari 04/06/2018
    • Shishir "Madhukar" 04/06/2018
  7. krishan saini 04/06/2018
    • Shishir "Madhukar" 04/06/2018
  8. Dr Swati Gupta 04/06/2018
    • Shishir "Madhukar" 04/06/2018
  9. Kiran kapur Gulati 01/07/2018
  10. Kiran kapur Gulati 01/07/2018
    • Shishir "Madhukar" 01/07/2018

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