हम कब के मर गए – शिशिर मधुकर

दिल में बसाया आपने तन्हा फिर कर गए यारां तुम आके देख लो हम कब के मर गए वादा किया था आपसे लो होंठ सिल लिए कहने दो ज़ालिमों को चलो हम तो डर गए आज भी खड़े हैं वहीँ तुम जहाँ से मुड़ गए ऐसा ना हो आके कहो तुम हम किधर गए कितने हसीन सपनों से दो आँखें थी भरी कैसे बताएं तुमको अब वो सब बिखर गए मधुकर मुक़द्दरों ने जिनका साथ ना दिया वो सब यहाँ ग़मगीन हैं जो उस डगर गए शिशिर मधुकर

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10 Comments

  1. Dr Swati Gupta 01/06/2018
    • Shishir "Madhukar" 01/06/2018
  2. C.M. Sharma 01/06/2018
    • Shishir "Madhukar" 01/06/2018
  3. Rajeev Gupta 01/06/2018
    • Shishir "Madhukar" 01/06/2018
    • Shishir "Madhukar" 02/06/2018
  4. Bhawana Kumari 02/06/2018
    • Shishir "Madhukar" 02/06/2018

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