नाजुक कंधे Bhawana kumari

छोटे बच्चे नाजुक कंधे नाजुक कंधे भारी बस्ते बोझ कैसे उठाऊँ में रोज सुबह माँ मुझे जगाती दौड़ा दौड़ा कर ब्रश कराती रगड़ रगड़ कर मुुझे नहलाती कभी चिल्लाती कभी मारती लेकिन वह समझ नहीं पाती दादी तुम उसको समझाओ ना । उसकी मार से बचाओ ना । व तो दिन भर घर में रहती टीवी देख देख मन बहलाती मेरे कंधे नाजुक है टीचर को यह बताओ ना । स्कुल में भी नहीं देती खेलने घर पर मम्मा कहती पढो पढो तुम मेरे संग खेल खेल कर मेरा मन बहलाओ ना। मुझको भी तुम रोज नई राजा रानी की कहानी सुनाओ ना छोटे बच्चे नाजुक कंधे नाजुक कंधे भारी बस्ते तुम सबको यह समझाओ ना।

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11 Comments

  1. Dr Swati Gupta 01/06/2018
    • Bhawana Kumari 02/06/2018
  2. C.M. Sharma 01/06/2018
    • Bhawana Kumari 02/06/2018
  3. Shishir "Madhukar" 01/06/2018
    • Bhawana Kumari 02/06/2018
  4. Atul Kumar Rai 01/06/2018
  5. Rajeev Gupta 01/06/2018
    • Bhawana Kumari 02/06/2018
    • Bhawana Kumari 02/06/2018

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