गर्मियों की छुट्टियां- बाल कविता – डी के निवातिया

गर्मियों की छुट्टियां

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मई जून का जब महीना आयाबाल गोपालो का मन हर्षायापढ़ाई-लिखाई से मनवा रूठाटीचर की डाँट से पीछा छूटा !!

   अब सुबह न जल्दी उठना होगारोना-धोना न कोई बहाना होगाबस खेल कूद को मनवा चाहेसैर सपाटे पर अब जाना चाहे !!

नाना-नानी से सुनेगें कहानीमन को हरति दिलकश वाणीदादा-दादी संग अब काटेगें रातेउनसे दिल खोलकर करेंगे बाते !!

  चाचा-चाची के संग मौज उड़ायेमामा-मामी के घर मिल आयेभाई-बहनो के संग करेंगे मस्तीहार जीत में होंगी हालत खस्ती !!

शहर की किच-पिच से पीछा छूटेऐ०सी० कूलर से अब मन है रूठेखेत खलिहानो में हम जाना चाहेनहर पोखरों में अब नहाना चाहे!!

   बाग़ बगीचें और फल-फूल चाहिएबहते पानी में थोड़ा सुकून चाहिएतितलियों के संग संग हम उड़ेंगेजुगनुओं को मुट्ठी में बंद करेंगे !!

खेल खेल में जब कसरत होंगीपूरी अपनी हर एक हसरत होंगीमन में बाकी कोई न बोझ रहेगामन अब हर्षित प्रफुल्लित रहेगा !!

   कम होगा मम्मी-पापा का तनावबैठेंगे परिवार के संग अपने गावँदृश्य कितना सुंदर मनमोहक होगाजब छुट्टियों का आनंद भरपूर होगा !!!!!

डी के निवातिया

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18 Comments

  1. mukta 30/05/2018
    • डी. के. निवातिया 28/06/2018
  2. rakesh kumar 30/05/2018
    • डी. के. निवातिया 28/06/2018
  3. Dr Swati Gupta 31/05/2018
    • डी. के. निवातिया 28/06/2018
  4. C.M. Sharma 31/05/2018
    • डी. के. निवातिया 28/06/2018
  5. Shishir "Madhukar" 31/05/2018
    • डी. के. निवातिया 28/06/2018
  6. Rajeev Gupta 31/05/2018
    • डी. के. निवातिया 28/06/2018
  7. Bhawana Kumari 31/05/2018
    • डी. के. निवातिया 28/06/2018
    • डी. के. निवातिया 28/06/2018
  8. Anu Maheshwari 04/06/2018
    • डी. के. निवातिया 28/06/2018

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