भंवर रिश्तों के – शिशिर मधुकर

ये माना रास्ते मुश्किल हैं और मन उदास है ज़िन्दगी से नहीं शिकवा अगर रहती वो पास हैहर तरफ आग बरसे है कहीं बादल नहीं दिखते धरा फिर से हरी होगी मगर पलती ये आस है बेरुखी जिसने की मुझसे उसे मैंने वहीँ छोड़ा मगर तुमको नहीं छोड़ा बात कोई तो ख़ास है मुझे मंज़ूर है सब कुछ मगर अपमान चुभता है ऐसे इंसान की सूरत कभी आती ना रास हैलाख फूलों की राहें हों मगर पीड़ा नहीं थमती अभी चुभती है पैरों में लगी कुछ ऐसी फांस है मुहब्बत ढूंढने वालों संभल कर साथिया चुनंना यहाँ लोगों के बदनों पे बड़ा नकली लिबास है भंवर रिश्तों के भी मधुकर वहां पर लील लेते हैं जहाँ ढूंढे से भी मिलता नहीं कोई निकास है शिशिर मधुकर

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18 Comments

  1. ANU MAHESHWARI 26/05/2018
    • Shishir "Madhukar" 26/05/2018
  2. Bhawana Kumari 26/05/2018
    • Shishir "Madhukar" 26/05/2018
  3. C.M. Sharma 26/05/2018
    • Shishir "Madhukar" 26/05/2018
  4. Dr Swati Gupta 26/05/2018
    • Shishir "Madhukar" 26/05/2018
  5. Bindeshwar prasad sharma 26/05/2018
    • Shishir "Madhukar" 26/05/2018
  6. डी. के. निवातिया 26/05/2018
    • Shishir "Madhukar" 26/05/2018
  7. Rajeev Gupta 26/05/2018
    • Shishir "Madhukar" 26/05/2018
  8. rakesh kumar 28/05/2018
    • Shishir "Madhukar" 28/05/2018
  9. kiran kapur gulati 20/06/2018
    • Shishir "Madhukar" 20/06/2018

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