कवि नही हूँ Bhawana kumari

कवि नही हूँ पर कविता लिखती हूँ । शब्दों को पिरोना नहीं आता फिर भी उसे एक धागे में पिरोती हूँ। शायद कुछ लिख दुं इस ख्याल से हर बार कुछ लिखनेकी कोशिश करती हूँ। कवि नही हूँ पर कविता लिखती हूँ। बस यूँ ही कुछ लिखते लिखतेशब्दों की एक माला बन जाती है जब कुछ ख्याल मन में आता है तो उसे कोरे कागज पर उतार खुद को कवि समझबैठती हूँ। कवि नही हूँ पर कविता लिखती हूँ। माँ कहती है कभी न बैठो खाली । इसलिएसादे कागज पर कुछ शब्दों को पिरोती हूँ। कवि नही हूँ पर कविता लिखती हूँ। मन में एक उम्मीद लेकर कल मै भी बन सकती हूँ कवि। इसलिए शब्दो की पोटली से कुछ शब्द चुन कर शब्दों की माला पिरोती हूँ। कवि नही हूँ पर कविता लिखती हूँ।

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18 Comments

  1. C.M. Sharma 26/05/2018
    • Bhawana Kumari 27/05/2018
  2. ANU MAHESHWARI 26/05/2018
    • Bhawana Kumari 27/05/2018
  3. Dr Swati Gupta 26/05/2018
    • Bhawana Kumari 27/05/2018
  4. Shishir "Madhukar" 26/05/2018
    • Bhawana Kumari 27/05/2018
  5. Bindeshwar prasad sharma 26/05/2018
    • Bhawana Kumari 27/05/2018
  6. डी. के. निवातिया 26/05/2018
    • Bhawana Kumari 27/05/2018
  7. meena29 28/05/2018
    • Bhawana Kumari 28/05/2018
  8. rakesh kumar 28/05/2018
    • Bhawana Kumari 28/05/2018
  9. kiran kapur gulati 23/06/2018
  10. Bhawana Kumari 24/06/2018

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