अब नहीं फुरसत – शिशिर मधुकर

तुम्हारे हुस्न के जलवे हमें अब भी सताते हैं हमें पर कुछ नहीं होता ये गैरों को जताते हैं तुम ही सच जानते हो बस गए कैसे निगाहों में महज़ एक दोस्त हो गैरों को पर हम ये बताते हैं हमें तो बंदिशों ने ज़िन्दगी में ऐसा जकड़ा है हाल ए दिल कह के ग़ज़लों में ही बस सबको सुनाते हैं यूँ तो झुकना नहीं सीखा हमनें रिश्तों की दुनिया में मगर तुमको ना जाने क्यों सदा झुककर मनाते हैं किसी को अब नहीं फुरसत जो मधुकर पीर को सुन ले तन्हा रहकर दीवारों को अपने दुखड़े सुनाते हैं शिशिर मधुकर

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30 Comments

  1. Bhawana Kumari 23/05/2018
    • Shishir "Madhukar" 24/05/2018
    • Shishir "Madhukar" 24/05/2018
  2. Abhishek Rajhans 24/05/2018
    • Shishir "Madhukar" 24/05/2018
  3. C.M. Sharma 24/05/2018
    • Shishir "Madhukar" 24/05/2018
  4. Dr Swati Gupta 24/05/2018
    • Shishir "Madhukar" 24/05/2018
  5. ANU MAHESHWARI 24/05/2018
    • Shishir "Madhukar" 24/05/2018
    • Shishir "Madhukar" 24/05/2018
  6. डी. के. निवातिया 24/05/2018
    • Shishir "Madhukar" 24/05/2018
  7. Rajeev Gupta 25/05/2018
    • Shishir "Madhukar" 25/05/2018
  8. sukhmangal singh 26/05/2018
  9. Shishir "Madhukar" 27/05/2018
    • Shishir "Madhukar" 28/05/2018
  10. Atul Kumar Rai 01/06/2018
    • Shishir "Madhukar" 01/06/2018
  11. mukta 06/06/2018
    • Shishir "Madhukar" 06/06/2018
  12. kiran kapur gulati 17/06/2018
    • Shishir "Madhukar" 18/06/2018
  13. Rinki Raut 22/06/2018
    • Shishir "Madhukar" 22/06/2018

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