बचपन – मधु तिवारी

🌹बचपन🌹 …..मधु तिवारीबचपन होता भोला-भाला।जिसका खेल गजब निराला।छुपा छुपाई गुल्ली डंडा,बाटी भंवरा खेले लाला।बातें अजब भुलाई न जाए। गीले नैन रुलाई न जाए।रुकी हुई अधरों पर बातें,कौन सुने और किसे बताएं।बचपन के साथी नहीं मिलते।मुस्कान वैसे न अब खिलते।नजरें तलाशे हरदम उनको,दिखा कोई तो पलक न हिलते।इमली वाली चटकार जहां।ले चलो मुझे एक बार वहां।कोई बताए मुझको जरा,झरबेरी के हैं बेर कहां।वह कैसी सुंदर यारी थी।लगती हमे बड़ी प्यारी थी।कभी रुठे कभी माने हम,बचपन की दुनिया न्यारी की।मन पंंछी उड़कर वहीं जाएं।सोंचे वो खुशियां फिर से पाएँ। ढूंढ ढूंढ कर सब साथी को,फिर से वही महफिल जमाएं।✍🏻 श्रीमती तिवारी, रायपुर, छत्तीसगढ़।🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

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14 Comments

  1. ANU MAHESHWARI 23/05/2018
    • Madhu tiwari 23/05/2018
  2. डी. के. निवातिया 23/05/2018
    • Madhu tiwari 23/05/2018
  3. Bhawana Kumari 23/05/2018
    • Madhu tiwari 23/05/2018
  4. nitesh banafer 23/05/2018
    • Madhu tiwari 23/05/2018
  5. C.M. Sharma 24/05/2018
    • Madhu tiwari 26/05/2018
  6. Dr Swati Gupta 24/05/2018
    • Madhu tiwari 26/05/2018
  7. Shishir "Madhukar" 24/05/2018

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