चार दिन की चाँदनी के वास्ते…सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

वक़्त बदले की निशानी देखना…सड़क पे पगड़ी उछलती देखना….कमतर लगेंगे ज़हर के तीर भी…बदज़ुबानी चीर करती देखना…शर्म,शील,लिहाज की बात न होगी…बाड़ खुद ही खेत खाती देखना….चार दिन की चाँदनी के वास्ते…..रक्त रंजित शादमानी देखना….गर न बदला हरकतों को तू ‘चँदर’…वक़्त पहले खत्म कहानी देखना….\/सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…शादमानी – हर्षो उल्लास, ख़ुशी, उत्साह 

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16 Comments

  1. Madhu tiwari 23/05/2018
    • C.M. Sharma 24/05/2018
  2. ANU MAHESHWARI 23/05/2018
    • C.M. Sharma 24/05/2018
  3. डी. के. निवातिया 23/05/2018
    • C.M. Sharma 24/05/2018
    • C.M. Sharma 24/05/2018
  4. Dr Swati Gupta 24/05/2018
    • C.M. Sharma 26/05/2018
    • C.M. Sharma 26/05/2018
  5. Shishir "Madhukar" 24/05/2018
    • C.M. Sharma 26/05/2018
  6. Bhawana Kumari 25/05/2018
    • C.M. Sharma 26/05/2018

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