सादगी

उड़ते बाल जबचेहरे पर आ जाते हैलहराती हैं हवाऐपर्वत गीत गाते हैं |पलकें आपकी तोहया बहुत लुटाती हैंकाले बादलों में जैसेमेघ घनघनाते हैं |छोटे-छोटे दाँत दिखाकरबच्चे जैसे हंश जाते हैंऐसी मासूम हंशी सेआप मुस्कुराते हैं |खड़ी कोई तस्वीर जैसेअपने को समेटे हुयेअपनी ही सादगी मेंआप जगमगाते हैं |

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9 Comments

  1. C.M. Sharma 22/05/2018
  2. C.M. Sharma 22/05/2018
  3. Rakesh kumar 22/05/2018
  4. Bhawana Kumari 22/05/2018
  5. Bindeshwar prasad sharma 22/05/2018
  6. ANU MAHESHWARI 22/05/2018
  7. Madhu tiwari 23/05/2018
  8. Shishir "Madhukar" 24/05/2018
    • rakesh kumar 24/05/2018

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