जमाने ने यह कैसी करवट ली – अनु महेश्वरि

जमाने ने यह कैसी करवट ली है,शोर के बीच एक खामोशी सी है।यह कैसे वक़्त का आगाज हुआ,हर कोई यहाँ देखो नाख़ुश ही है।बैचेनी का आलम बढ़ता हुआ सा,उठता हुआ कहीं एक धुंआ भी है। अनु महेश्वरी

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12 Comments

  1. Dr Swati Gupta 20/05/2018
    • ANU MAHESHWARI 21/05/2018
  2. Shishir "Madhukar" 20/05/2018
    • ANU MAHESHWARI 21/05/2018
  3. Bhawana Kumari 20/05/2018
    • ANU MAHESHWARI 21/05/2018
  4. C.M. Sharma 21/05/2018
    • ANU MAHESHWARI 21/05/2018
  5. Bindeshwar prasad sharma 21/05/2018
    • ANU MAHESHWARI 21/05/2018
  6. डी. के. निवातिया 21/05/2018
    • ANU MAHESHWARI 21/05/2018

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