जाने ये किसका दोष है – शिशिर मधुकर

ढूंढ़ते हैं हम जहाँ पे ज़िन्दगी मिलती नहीं जाने ये किसका दोष है कलियां अब खिलती नहींपत्तियां इस पेड़ की खामोश हैं मायूस हैं जब हवा ही ना चले तन्हा ये हिलती नहींइस कदर कमज़ोर है कुछ आज धागा प्रेम का लाख कोशिश कर ले कोई चोटें तो सिलती नहीं गर्द इतनी जम चुकी है रिश्तों के संसार में कुछ भी कर लो मोटी परतें इसकी अब छिलती नहींझांक लो अब जिस भी घर में केवल यही तुम पाओगे रोटियां वो प्रेम की मधुकर कहीं बिलती नहींशिशिर मधुकर

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14 Comments

  1. hindiarticles 20/05/2018
    • Shishir "Madhukar" 20/05/2018
  2. Dr Swati Gupta 20/05/2018
    • Shishir "Madhukar" 20/05/2018
  3. ANU MAHESHWARI 20/05/2018
    • Shishir "Madhukar" 20/05/2018
  4. Bhawana Kumari 20/05/2018
    • Shishir "Madhukar" 22/05/2018
  5. C.M. Sharma 21/05/2018
    • Shishir "Madhukar" 22/05/2018
  6. Bindeshwar prasad sharma 21/05/2018
    • Shishir "Madhukar" 22/05/2018
  7. डी. के. निवातिया 21/05/2018
    • Shishir "Madhukar" 22/05/2018

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