अपना – पराया – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

कवि – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु) यहाँ अपना पराया कुछ भी नहीं है दोस्त जो था जो है जो रहेगा सब एक सपना है। जिसे हम अच्छा समझते थे, दगा दे गया उसूलों की बात करता, पर कौन अपना है।

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16 Comments

  1. Dr Swati Gupta 18/05/2018
  2. ANU MAHESHWARI 18/05/2018
  3. डी. के. निवातिया 18/05/2018
  4. Abhishek Rajhans 18/05/2018
  5. Bhawana Kumari 18/05/2018
  6. C.M. Sharma 19/05/2018
  7. mukta 20/05/2018
  8. Shishir "Madhukar" 20/05/2018

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